football information for betting फुटबॉल का इतिहास और फुटबॉल खेल के नियम एवं पूरी जानकारी

Tuesday , 12 Sep 2019 Football Information in Marathi, Rules History & Wikipedia फुटबॉल माहिती
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Football Full History in Hindi and Rules: किसी का कोई ना कोई पसंदीदा खेल होता है. किसी को क्रिकेट पसंद है, किसी को टेनिस. किसी को फुटबॉल तो किसी को कबड्डी आदि खेलों में रूचि होती है. अपने फेवरेट खेल के बारे में जानकारी जुटाने में अच्छा लगता है और प्रशंसक चाहता है कि उसे अपने फेवरेट खेल के बारे में पूर्ण जानकारी हो. जैसे पूरी दुनिया में क्रिकेट लोकप्रिय है. उसी तरह से फुटबॉल भी एक लोकप्रिय खेल है. फुटबॉल में ऐसे बेहतरीन खिलाड़ी हुए हैं. जिन्होंने दर्शकों का ध्यान फुटबॉल की तरफ खींचा है.
आज उनके प्रदर्शन और मेहनत के बलबूते के कारण फुटबॉल बहुत ही लोकप्रिय बन चुका है. जिससे फुटबॉल के बारे में जानने के लिए लोग उत्सुक होते हैं. इसीलिए आज हम आपको फुटबॉल के बारे में पूरी जानकारी लेकर आए हैं, जिसे जानकर आप फुटबॉल को गहराई से समझ पाएंगे.
इसके बारे में आज हम आपको बताएंगे कि कैसे फुटबॉल नाम के खेल को खेलना शुरू किया और फुटबॉल के उन तमाम नियमों को बताएंगे जिन्हें जानकर आप एक बेहतरीन खिलाड़ी की भूमिका भी निभा सकते हैं.
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फुटबॉल उत्पत्ति के बारे में यदि हम बात करें तो फुटबॉल शब्द की उत्पत्ति के बारे में लोगों की अलग-अलग राय हैं. फीफा के अनुसार फुटबॉल एक चीनी खेल सुजु का विकसित रूप है यानी कि चीन में जो इस तरह का ही खेल खेला जाता था उसे सुजु कहा जाता था. उसी से यह विकसित हुआ है. यह खेल चीन में ह्यां वंश के दौरान विकसित हुआ था. जबकि जापान में असुका वंश के शासन काल में केमरी के नाम से भी फुटबॉल खेल को जाना जाता था. कालांतर में 1586 में ये जॉन डेविस नाम के समुद्री जहाज के कप्तान के कार्यकर्ताओं ने ग्रीनलैंड में खेला. 15 वीं शताब्दी में फुटबॉल नाम से ही ये खेल स्कॉटलैंड में खेला गया. इस तरह से फुटबॉल शब्द की उत्पत्ति के बारे में बताया गया है यानी कि फुटबॉल खेला तो बहुत पहले से ज्यादा था लेकिन अलग-अलग देश में अलग-अलग नाम से जाना जाता था.
अब हम आपको बताते हैं कि फुटबॉल की इतिहास के बारे में
हम आपको बता चुके हैं कि फुटबॉल खेल खेला तो पहले से जाता था लेकिन इसका नाम बाद में फुटबॉल पड़ा. ब्रिटेन के राजकुमार हेनरी चतुर्थ ने 1408 ई. में फुटबॉल शब्द का इस्तेमाल अंग्रेजी में किया था. 1526 इंग्लैंड के राजा किन हेनरी अष्टम ने फुटबॉल खेलने में रुचि जताई और एक विशेष प्रकार का जूता बनवाया. 1580 में सर फिलिप सिडनी में एक कविता में महिलाओं द्वारा फुटबॉल खेल का वर्णन किया.
16 वीं शताब्दी के अंत में 17वीं शताब्दी के आरंभ में पहली बार फुटबॉल खेल के मुकाबले की भावना को लाने के लिए गोल की धारणा का विकास हुआ. खिलाड़ियों ने मैदान में दो विपरीत शीर्ष में झाड़िया लगाकर गोलपोस्ट का निर्माण किया. 17 वीं शताब्दी के दौरान 8 या 12 गोल का एक मैच खेला जाता था. football information for project
19वीं शताब्दी में व्यापक रूप से फुटबॉल के विभिन्न रूप के साथ इंग्लैंड के पब्लिक स्कूलों में खेला गया था. इतिहासकारों की मानें तो फुटबॉल क्लब की शुरुआत 1824 में एडिबर्ग में हुई थी. शुरुआत में क्लब विद्यार्थियों द्वारा बनाया जाता था. उन्हीं में से एक शेफील्ड फुटबॉल क्लब है जो एक अंग्रेजी फुटबॉल क्लब है. इसकी स्थापना 24 अक्टूबर 1857 में हुई थी. दुनिया का सबसे पुराना सक्रिय फुटबॉल क्लब है. अंग्रेजी क्लब नोट्स काउंटी जो कि 1862 में बनाया गया. इस खेल का फैलाव शुरू होना चालू हो गया और व्यापारियों ने फुटबॉल में अपनी रुचि दिखाई.
बता दें कि फुटबॉल की सबसे पहली प्रतियोगिता 1872 में खेली गई जो इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के बीच हुआ था. इस खेल को देखने के लिए 4000 लोग आए थे. खेल 0-0 की बराबरी पर खत्म हुआ. 1883 में दुनिया का पहला अंतर्राष्ट्रीय मुकाबला खेला गया जिसमें आयरलैंड, इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स की टीमों ने भाग लिया था. इस तरह से फुटबॉल इंग्लैंड में फला फूला और जल्द ही पूरे यूरोपीय महाद्वीप में फैल गया. यूरोप के बाहर ये खेल सबसे पहले अर्जेंटीना में खेला गया था.
1904 में फीफा, अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल संस्था का गठन पेरिस में हुआ था और घोषणा की गई थी कि फुटबॉल एसोसिएशन नियमों का पालन करना होगा. फीफा का जमीनी अधिनियम फ्रांस, बेल्जियम, डेनमार्क नीदरलैंड्स, स्पेन स्वीडन और स्विटजरलैंड के प्रतिनिधियों द्वारा हस्ताक्षरित किया गया था. शुरुआत में इंग्लैंड और दूसरे ब्रिटिस्ट देश नहीं थी. 1913 में फीफा अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल एसोसिएशन बोर्ड के प्रतिनिधित्व के प्रवेश के कारण दुनिया में फुटबॉल की लोकप्रियता बढ़ी. तब से धीरे-धीरे करके यह खेल पूरी दुनिया में फैल गया और लोगों की फुटबॉल के प्रति रूचि बढ़ने लगी. वर्तमान में फीफा के 4 प्रतिनिधि और चारों ब्रिटिश एसोसिएशन का एक प्रतिनिधि बोर्ड शामिल है.
फुटबॉल पूरी दुनिया में खेला जाने लगा है अपने पसंदीदा टीमों का अनुकरण करने के लिए लाखों लोग नियमित रूप से फुटबॉल मैदान में जाते हैं और करोड़ों की संख्या में लोग टेलीविजन पर फुटबॉल को बड़े शौक से देखते हैं.
भारत में यह कहना गलत नहीं है कि भारत में क्रिकेट को ज्यादा पसंद किया जाता है. फिर भी फुटबॉल ने अपनी एक जगह बना रखी है और फुटबॉल प्रेमियों की भी भारत में कमी नहीं है. पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में फुटबॉल ज्यादा खेली जाती है. भारत ब्रिटेन का उपनिवेश रहा है इसलिए ब्रिटेन के खेलों को भी इंडिया में पहचान मिली थी. फुटबॉल भारत में लोकप्रिय हुई है तो उसके पीछे नागेंद्र प्रसाद सर्वाधिकारी का योगदान है. इन्हें भारतीय फुटबॉल का जनक भी कहा जाता है. सबसे पहले भारत में स्कूल के मैदानों में इस खेल की शुरुआत की गई. can you place a bet online नागेंद्र प्रसाद ने फुटबॉल को बढ़ाने में पूरा योगदान दिया इन्होंने बॉयज क्लब बनाया. 1880 तक कोलकाता में कई फुटबॉल कल्ब बन गए थे. जिनके बनने में नागेंद्र प्रसाद जी का पूरा हाथ है और आज भारत में फुटबॉल को तवज्जो मिली है. इसके बाद नागेंदऐ जी ने सोवाबाजार नमक क्लब बनाया. सन् 1950 में भारत ने वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई किया लेकिन भारतीय टीम के पास वर्ल्ड कप में जाने के पैसे नहीं थे. उस दौरान भारत ने वर्ल्ड कप की बजाय ओलंपिक को ज्यादा महत्व दिया. भारत ने आगे फुटबॉल में पार्टिसिपेट किया. 1956 और 1958 के ओलंपिक में भारतीय टीम नंबर 4 पोजीशन पर रही और यही दौर भारतीय फुटबॉल का गोल्डन दौर कहा जाता है. इस तरह भारत में फुटबॉल खेल की लोकप्रियता बनी.
फुटबॉल का खेल पैर से खेला जाता है जिसमें पैर से खिलाड़ी गोल करते हैं. ये खेल एक गोल गेंद से खेला जाता और चूंकि पैर से खेलते है इसलिए फुटबॉल कहा जाता है. 11 खिलाड़ियों की दो टीमें होती है. जिसमें प्रत्येक खिलाड़ी दूसरी टीम के गोलपोस्ट में गेंद डालने की कोशिश करता है खिलाड़ी को गोल प्राप्त होते हैं और वो ज्यादा गोल करती है तो विजेता होती है और यदि दोनों टीम समान ही गोल करें तो खेल ड्रॉ हो जाता है. ये खेल 90 मिनट का होता है जिसमें 45 मिनट पर एक ब्रेक होता है. जो 15 मिनट का होता है. इस दौरान यदि कोई भी खिलाड़ी घायल हो जाता है तो इंजरी टाइम के तहत कुछ देर के लिए खेल को स्थगित किया जा सकता है और दोबारा से खेल आरंभ हो जाता है.
वर्तमान समय में फुटबॉल को बेहतर तरीके से बनाया जाने लगा है और कई बेहतर फुटबॉल कंपनियां स्थापित हो चुकी है, जो मैच में खिलाड़ियों की उम्र, मैदान आदि सभी को ध्यान में रखते हुए फुटबॉल का निर्माण कर रही है. फुटबॉल की गेंद 58 सेंटीमीटर से 61 सेंटीमीटर की मध्य की परिधि का एक वृत्ताकार गेंद होती है.
फुटबॉल के मैदान की लंबाई को साइडलाइन और चौड़ाई को गोल लाइन कहते हैं. 50 गज, 100 से लेकर 130 गज आयताकार आकार का होता है. खेल के मैदान के बीच में एक रेखा होती है जो मैदान को दो बराबर भागों में बांटती है. मध्य केंद्र से 10 गज त्रिज्या का एक वर्त खींच दिया जाता है. इसे आरम्भ का वर्त कहते हैं. मैदान के दोनों सिरों पर 8 गज चौड़े गोल क्षेत्र होते हैं. गोल क्षेत्रों के दोनों ओर 18.18 गज का आयताकार पेनाल्टी क्षेत्र होता है.
अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए पिच की लंबाई 110 मीटर होती है और चौड़ाई 64 से 75 मीटर होती है वहीं अन्य खेलों में यह लंबाई 91 से 120 मीटर और चौड़ाई 45-91 मीटर की होती है. आमतौर पर जाल गोल के पीछे रखा जाता है लेकिन नियमों के अनुसार उसकी कोई आवश्यकता भी नहीं होती है.
अब हम आपको बताएंगे कि फुटबॉल को खेलने का तरीका और उसके नियम क्या होते हैं.
फुटबॉल की इतिहास के बारे में जानने के साथ-साथ यह भी जानना बहुत जरूरी है कि फुटबॉल को कैसे खेला जाता है उसके नियम क्या होते हैं इसलिए जानिए विस्तार से  फुटबॉल के नियम है और कैसे खेला जाता है फुटबॉल
फुटबॉल मैच दो टीमों के बीच खेला जाता है ये आप अच्छे से जानते हैं. जिसमें दोनों टीमों में 11-11 खिलाड़ी होते हैं. how to bet football games online कुल 90 मिनट का खेल होता है. गोल पोस्ट पर गोल बचाने और दूसरी गोल पोस्ट में गोल करने की कोशिश करते हुए इस खेल में हार-जीत तय की जाती है. जैसे क्रिकेट के खेल में एंपायर होता है वैसे ही फुटबॉल में सारी अथॉरिटी रेफरी के पास होती है और रेफरी का निर्णय ही मान्य होता है. रेफरी के साथ एक सहायक रेफरी होता है जो रेफरी की मदद करता है. खेल शुरू करने से पहले टॉस किया जाता है जिसमें जीतने वाला कप्तान ही तय करता है उसकी टीम गोलपोस्ट पर अटैक करना चाहती है. या फिर बॉल को किक ऑफ यानी किक मारना चाहती है. फुटबॉल खेल में सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि जब भी मैच में कोई गोल होता है तो बोल को सेंट्रल लाइन पर रखकर दोबारा शुरू किया जाता है.
# किक ऑफ-  गेम टाइम की शुरुआत किक मारने के साथ होती है, जिसे किकऑफ़ कहते हैं.
# थ्रो-इन किक- इस किक में जब बोल पूरी तरह से रेखा पार कर जाती है तब उस विरोधी टीम को इनाम में मिलती है जो बोल आखिरी बार छुए.
# इनडायरेक्ट फ्री किक- जब किसी विशेष फाउल के बॉल को बाहर भेज दिया जाता है और खेल रुक जाए तो टीम को इनडायरेक्ट फ्री किक इनाम में मिलती है.
# कॉर्नर किक- जब बॉल बिना गोल के ही पूरी तरह गोल रेखा को पार कर जाती है तो डिफेंस करने वाली टीम बॉल को आखिरी बार छुने के कारण दूसरी टीम को मौकै देती है.
# गोल किक- जब बॉल गोल रेखा को पार कर जाए तो गोल के बिना ही स्कोर होता है और अटैकर द्वारा बॉल को आखिरी बार छुने के कारण डिफेंस करने वाली टीम को इनाम मिलता है
# ड्रॉपड बॉल –  जब रेफरी किसी दूसरी वजह से गेम को रोक देता है जैसे प्लेयर को गंभीर चोट लगना यह बॉल का खराब हो जाना उसे ड्रॉपड बॉल कहते है.
# येलो कार्ड-   येलो कार्ड का मतलब होता है कि खिलाड़ी ने मैदान में कोई गलती की है जिसमें येलो कार्ड दिखाकर रेफरी खिलाड़ी को मैदान से बाहर कर देता है.
# रेड कार्ड- खेल में दूसरी बार पीला कार्ड मिलने का मतलब है कि रेड कार्ड मिल चुका है. रेड कार्ड मिलने के कारण एक प्लेयर मैदान से बाहर निकाल दिया जाता है तो दूसरी जगह कोई दूसरा प्लेयर नहीं आ सकता.
# ऑफ साइड- इस नियम में आगे के प्लेयर बॉल के बिना बचाव करते दूसरे प्लेयर के आगे नहीं जा सकते खासकर विरोधी टीम की गोल रेखा के एकदम पास नहीं जा सकते हैं.
# पेनल्टी शूटआउट- लीग गेम में खेल डॉ के साथ खत्म हो सकता है लेकिन कुछ नॉकआउट गेम्स में अगर खेलते समय तक टाई  रहा तो वह मैच एक्स्ट्रा टाइम तक चल सकता है लेकिन हो सकता है कि एक्स्ट्रा टाइम के बाद मैच टाई ही रहा हो तो ऐसी स्थिति में पेनल्टी शूटआउट नियम का प्रयोग किया जाता है इस नियम के मुताबिक पहले पेनल्टी पॉइंट से किक मारने को कहा जाता है.
# पेनल्टी एरिया- पेनल्टी एरिया गोल के सामने का एरिया होता है. यह एरिया सर्किल लाइन से पहचाना जा सकता है. यह गोलपोस्ट से 16.5 मीटर की दूरी तक होता है. बायचुंग भूतिया आता देणार फुटबॉलचे धडे
# पेनल्टी किक- यदि गोलकीपर की पोजीशन या डिफेंस करने वाली टीम कोई फाउल कर देते तो सजा के तौर पर पेनल्टी दी जाती है. NEXT…
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